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From Ghalib To Saqi, Drink That’s Divine by RKB

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🥃That Drink That Drinks Us All🥃

एक ही विषय पर 5 शायरों का अलग नजरिया…. जरूर पढें :- आप उर्दू शायरी की महानता की दाद देने पर मज़बूर हो जाएंगे…..

1- Mirza Ghalib: 1797-1869

“शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।”

……. इसका जवाब लगभग 100 साल बाद मोहम्मद इकबाल ने दिया……

2- Iqbal: 1877-1938

“मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं ,
काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।”

……. इसका जवाब फिर लगभग 70 साल बाद अहमद फराज़ ने दिया……

3- Ahmad Faraz: 1931-2008

“काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर,
खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।”

……. इसका जवाब सालों बाद वसी ने दिया……

4- Wasi:1976-present

“खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।”

वसी साहब की शायरी का जवाब साकी ने दिया

5- Saqi: 1986-present

“पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
*जन्नत में कौन सा ग़म है इसलिए वहाँ पीने में मजा नही।”…

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